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Monday, 7 September 2026

आठ नीतिगत बातें गोपनीय रखनी चाहिए।

संस्कृत का एक श्लोक है-आयु, वित्त, ग्रह छिद्रम दान, मान, अपमान, मंत्र, औषध नव गोपका। अर्थात ये आठ बातें किसी को बतानी नहीं चाहिए।


हालांकि आज लोग इन बातों को पुरातनपंथी या दकियानूसी बातें कह सकते हैं। लेकिन वे आज भी प्रसांगिक है। चलिए एक-एक को समझते हैं।

आयु-मानो आपने किसी को अपनी आयु बताई पचास साल। तो लोग कहेंगे-अरे वाह साब आपके लड़के ने तो छोटी सी आयु में ही मकान बना लिया, गाड़ी खरीद ली, बड़ी तरक्की कर ली। दूसरी तरह के लोग कहेंगे इसका तो आधा जीवन यूं ही बेकार चला गया, इसने तो यूं ही दर-दर की खाक छानी है। आपको कैसे भी चैन नहीं लेने देंगे।

वित्त अपनी आमदनी किसी को नहीं बतानी चाहिए। मान लो आपने कहा मैं तो पचास हजार महीना कमाता हूँ। तो लोग कहेंगे, बड़ा होनहार लड़का है, हमारा लड़का तो दस हजार भी नहीं कमाता। दूसरी तरह के लोग कहेंगे- झूठ बोलता है, इसको आता क्या है, मैं तो इसे दस हजार भी ना हूं।

ग्रह-छिद्रम-घर में कभी कोई बात हो जाए तो उसे बाहर कभी ना बताए। लोग पीछे से हंसी उड़ाते हैं। ये तो ऐसा ही है, इनके यहां तो रोज झगड़े होते हैं।

दान-आपने दान का दिखवा ना करें, इससे दान का फल नहीं मिलता, अहंकार जाता है।

मान-आपका कहीं पर मान हुआ है तो उसका भी महिमामंडन ना करे। ठीक है आपके घर वालों को पता है आपके ईश्वर को पता है कि आपने कोई अच्छा कार्य किया है।

अपमान आपका कहीं पर अपमान हुआ है तो उसे भी गुप्त हो रहीं नहीं तो लोग पीछे से हंसी उड़ाते हैं कि इसने काम ही ऐसा किया होगा, इसे तो और डांट पड़नी चाहिए।

मन्त्र अपना गुरु मंत्र कभी किसी को नहीं बताया जाता, इसे गोपनीय ही रखा जाता है।

औषध -पुराने लोग कोई दवा देते तो बताते नहीं थे, कि इसमें क्या-क्या डला है। कहते थे गाय के दूध से ले लेख।

तो हमें भी ये आठ नीतिगत बातें गोपनीय रखनी चाहिए।